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Ambalika


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बदलाव

Posted On: 12 Mar, 2010  
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एक खत

Posted On: 21 Feb, 2015  
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मेरी बेटी

Posted On: 16 Mar, 2012  
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लाचार माँ

Posted On: 25 Apr, 2011  
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यथार्थ

Posted On: 15 Apr, 2011  
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ढाई आखर प्रेम का- valentine contest”

Posted On: 6 Feb, 2011  
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एहसास-Valentine Contest ”

Posted On: 3 Feb, 2011  
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दर्द

Posted On: 14 Mar, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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के द्वारा: Ambalika Ambalika

के द्वारा: Ambalika Ambalika

ये सब सुनकर मै स्तब्ध रह गयी मुझे उनकी हालत देखकर बहुत रोना आ रहा था. कुछ देर उनसे बात करके मै अम्बालिका जी आज शायद मै आप से पहली बार मुखातिब हो रहा हूँ बधाई हो आप को आज आप का और रचना जी का दोनों का लेख बृद्ध के हालत पर था बहुत सुन्दर कोशिश -और ढेर सारी शुभ कामनाएं लिखती रहें रोना आप को ही क्या जिस किसी का भी दिल धडकता होगा उसमे कुछ सम्बेदनाएं होंगी वह इस दशा को देख रो पड़ेगा जो माँ बाप हमारे लिए बचपन से निछावर रहते हैं उनकी ये दशा आज के जागृत समाज में चिंता का विषय है आज बहुत से घरों में माँ बाप की दुर्दशा देखी जा रही है जितना हम संतान के लिए कर रहे मर रहे उतना ही वो हमें दूर कर सामान बना दे रहे बृद्ध आश्रम चल पड़े हैं दवा के लिए पैसे नहीं हैं उनकी बात कोई सुनने वाला नहीं है न कोई बात करने वाला यहाँ तक की छोटे बच्चों को भी उनके पास फटकने नहीं दिया जाता -कितना क्या कहें जय हो ... सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

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